कल्पना कीजिए… मैच का आखिरी ओवर, CSK को जीत के लिए 20 रन चाहिए, और क्रीज़ पर हैं ‘कैप्टन कूल’ MS Dhoni और रविंद्र जडेजा। पूरा स्टेडियम उनके एक हिट पर निहार रहा है। लेकिन क्या हुआ? धोनी का शॉट शिमरॉन हेटमायर के हाथों कैच बन गया, और CSK 6 रन से मैच हार गए। यह नज़ारा सिर्फ एक मैच का नहीं, बल्कि पिछले 5 सालों से CSK के ‘बड़े चेस’ की कहानी बयां करता है। पूर्व भारतीय ओपनर विरेंदर सेहवाग ने हाल ही में कुछ ऐसे आँकड़े पेश किए हैं, जो CSK और धोनी की इस कमज़ोरी को उजागर करते हैं।
“180+ का पीछा? CSK के लिए असंभव!”
सेहवाग के मुताबिक, “पिछले 5 सालों में CSK ने 180 से ज़्यादा के टारगेट कभी नहीं चेस किए।” यह आँकड़ा हैरान करने वाला है, खासकर उस टीम के लिए जिसे ‘चेसिंग मास्टर’ माना जाता था। सेहवाग ने याद दिलाया कि धोनी ने अतीत में असंभव लगने वाले मैच जिताए हैं, जैसे 2010 में धर्मशाला में इरफ़ान पठान के ओवर में 19 रन बनाना या 2016 में अक्षर पटेल के खिलाफ 24 रन की मार। लेकिन अब ऐसी नाटकीय जीतें गायब क्यों हैं?
“40 रन 2 ओवर में? यह कोई Dhoni का ज़माना नहीं!”
सेहवाग साफ़ कहते हैं, “आखिरी 2 ओवर में 40 रन चाहिए? चाहे कोई भी बड़ा खिलाड़ी हो, यह मुश्किल है। धोनी ने ऐसा किया, पर अब नहीं।” उनकी बात में दम है। RR के खिलाफ हालिया मैच में धोनी ने 11 गेंदों पर 16 रन बनाए, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था। पिछले कुछ सीज़न में CSK की मिडल ऑर्डर पर निर्भरता बढ़ी है, लेकिन फिनिशिंग की ज़िम्मेदारी अब भी 42 साल के धोनी पर ही है। क्या यह उम्र के साथ अनफेयर एक्सपेक्टेशन है?
फैंस की भावनाएँ: “धोनी आएगा, मैच जिताएगा?”
CSK फैंस का भरोसा धोनी में अटूट है। मैंने खुद चेन्नई के एक मैच में देखा—जब धोनी बल्लेबाज़ी के लिए उतरे, तो पूरा स्टेडियर “थला वरा धोनी!” (Come on, Dhoni!) चिल्लाने लगा। लेकिन अब यह भरोसा डगमगा रहा है। सोशल मीडिया पर एक फैन ने लिखा, “धोनी अब वो फिनिशर नहीं रहे। उन्हें नंबर 7 पर भेजना टीम के लिए रिस्की है।” दूसरी ओर, कुछ याद दिलाते हैं कि 2023 फाइनल में उन्होंने जडेजा के साथ मिलकर जीत दिलाई थी। लेकिन क्या एक मैच की यादें पुरानी कमज़ोरियों को छुपा सकती हैं?
दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मौका
5 अप्रैल को चेपॉक में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ CSK के पास अपनी रणनीति सुधारने का मौका है। क्या धोनी और कंपनी इस स्टैटिस्टिक्स को तोड़ पाएँगे? फैंस की उम्मीदें अब भी ज़िंदा हैं, क्योंकि जब तक “थलैवा” है, तब तक चेन्नई का विश्वास बरक़रार है!
क्या आपको लगता है कि CSK को अपनी चेसिंग स्ट्रैटेजी बदलनी चाहिए? कमेंट में बताएँ!